मक्का की खेती में सही समय और बीज का चुनाव – किसानों के लिए 11 जरूरी बातें
भारत के किसानों के लिए मक्का (Maize/Corn) की खेती एक लाभकारी फसल मानी जाती है। यह न केवल अनाज के रूप में बल्कि पशु चारे, तेल उद्योग और बायोफ्यूल उत्पादन में भी उपयोग होती है। लेकिन अक्सर किसान यह गलती कर देते हैं कि वे सही समय पर बुवाई और बीज का उचित चुनाव नहीं कर पाते, जिससे पैदावार पर बुरा असर पड़ता है।
👉 इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि मक्का की खेती में सही समय और बीज का चुनाव क्यों जरूरी है, कौन-सी किस्में सबसे अच्छी हैं और किन बातों का ध्यान रखकर किसान अपनी पैदावार दोगुनी कर सकते हैं।
🌱 मक्का की खेती का महत्व
- मक्का दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अनाज की फसल है।
- यह मानव भोजन के साथ-साथ पशुओं के चारे के रूप में भी उपयोगी है।
- मक्का से स्टार्च, तेल, बायोफ्यूल जैसी कई औद्योगिक चीजें तैयार होती हैं।
- भारत के कई राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में मक्का प्रमुख रूप से उगाई जाती है।

⏰ मक्का की बुवाई का सही समय
मक्का की बुवाई के लिए सही समय का चुनाव बेहद जरूरी है।
1. खरीफ सीजन (Rainfed Crop)
- बुवाई का समय: जून के अंत से जुलाई मध्य तक
- वर्षा आधारित खेती के लिए यही सबसे अच्छा समय है।
- अगर बारिश समय पर हो जाए तो बुवाई और भी सफल रहती है।
2. रबी सीजन
- बुवाई का समय: अक्टूबर से नवंबर
- इस मौसम में सिंचाई की सुविधा होना जरूरी है।
3. जायद सीजन
- बुवाई का समय: फरवरी से मार्च
- यह समय उन किसानों के लिए अच्छा है जिनके पास ट्यूबवेल या सिंचाई का अच्छा साधन उपलब्ध हो।
📌 याद रखें: अगर बीज सही समय पर नहीं बोया जाए तो अंकुरण और पैदावार दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
🌾 मक्का की खेती में बीज का चुनाव कैसे करें? (Focus Keyword: मक्का की खेती में बीज का चुनाव)
बीज का चुनाव ही मक्का की पैदावार का आधार है। सही बीज चुनने से फसल रोगों से बची रहती है और उपज भी अधिक मिलती है।
1. उच्च उपज वाली किस्में (High Yielding Varieties)
- जींगा सुपर, Ganga-5, Deccan-103 जैसी किस्में किसानों में लोकप्रिय हैं।
- ये किस्में सूखा और रोग प्रतिरोधक मानी जाती हैं।
2. हाइब्रिड बीज (Hybrid Seeds)
- ProAgro, Pioneer, Monsanto hybrid किस्में अधिक उपज देती हैं।
- इनका जीवनकाल कम होता है लेकिन पैदावार ज्यादा मिलती है।
3. स्थानीय किस्में
- गांव-क्षेत्र में जो परंपरागत किस्में बोई जाती हैं, वे स्थानीय जलवायु के अनुकूल रहती हैं।
- इनकी लागत कम आती है।
📌 बीज का चुनाव करते समय ध्यान रखें:
- बीज मान्यता प्राप्त स्रोत से ही खरीदें।
- बीज रोगमुक्त और साफ हो।
- अंकुरण क्षमता 80% से अधिक होनी चाहिए।
🔑 मक्का की खेती में बीज की मात्रा और बोने का तरीका
- बीज की मात्रा:
- खरीफ सीजन → 18–20 किलो प्रति हेक्टेयर
- रबी और जायद → 20–25 किलो प्रति हेक्टेयर
- बीज का उपचार:
- बीज को बुवाई से पहले थिरम या कार्बेन्डाजिम से उपचारित करना चाहिए।
- बुवाई का तरीका:
- कतार से कतार की दूरी → 60 सेमी
- पौधे से पौधे की दूरी → 20 सेमी
- गहराई → 4-5 सेमी
💧 सिंचाई और खाद प्रबंधन
- खरीफ की फसल में बारिश पर निर्भर रहना पड़ता है।
- रबी और जायद में पहली सिंचाई बुवाई के 20 दिन बाद करनी चाहिए।
- नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग जरूरी है।
- यूरिया को 3 बार विभाजित खुराक में देना सबसे बेहतर रहता है।
🌿 रोग और कीट नियंत्रण
- तना छेदक (Stem borer) – इसके लिए क्लोरपायरीफॉस का छिड़काव करें।
- भुट्टा सड़न – बीज उपचार और फसल चक्र अपनाएं।
- पत्ती झुलसा रोग – मैन्कोजेब का छिड़काव करें।
📈 मक्का की खेती से अधिक पैदावार पाने के आधुनिक उपाय
- ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक का उपयोग करें।
- हाइब्रिड बीजों का चुनाव करें।
- जैविक खाद और गोबर खाद का उपयोग बढ़ाएं।
- फसल चक्र (Crop Rotation) अपनाएं।
- समय-समय पर फसल की निगरानी करते रहें।
