🌸 कलश स्थापना की सही विधि और महत्व
कलश स्थापना (घट स्थापना) नवरात्रि के शुभारंभ का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। हिंदू परंपरा में इसे माँ दुर्गा का आवाहन माना जाता है।
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापित करके भक्त देवी को अपने घर या मंदिर में आमंत्रित करते हैं।
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि कलश स्थापना की सही विधि और महत्व क्या है, साथ ही इसके पीछे छिपे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण भी जानेंगे।
🪔 कलश स्थापना का महत्व क्या है?
- आध्यात्मिक दृष्टि से: कलश में देवी-देवताओं की शक्ति का वास माना जाता है।
- धार्मिक मान्यता: घट स्थापना से नवरात्रि की पूजा शुरू होती है।
- वैज्ञानिक दृष्टि से: मिट्टी का कलश, पानी, आम के पत्ते और नारियल – ये सभी ऊर्जा संतुलन और वातावरण शुद्धि का कार्य करते हैं।
- पौराणिक मान्यता: कलश को सृष्टि का प्रतीक माना जाता है।

📅 कलश स्थापना कब करनी चाहिए?
- नवरात्रि के पहले दिन (प्रतिपदा तिथि) को सुबह शुभ मुहूर्त में घट स्थापना की जाती है।
- शुभ मुहूर्त देखने के लिए पंचांग का सहारा लिया जाता है।
- आमतौर पर प्रातःकाल या मध्यान्ह काल को सबसे उत्तम माना जाता है।
🪔 कलश स्थापना की सही विधि
1. स्थान की तैयारी
- पूजा घर को अच्छी तरह साफ करें।
- पवित्र स्थान पर एक चौकी बिछाएँ और उस पर लाल कपड़ा बिछाएँ।
2. मिट्टी और जौ बोना
- एक मिट्टी के पात्र में साफ मिट्टी डालें।
- उसमें जौ या गेहूं बोएँ।
- ये अंकुरित होकर समृद्धि और उन्नति का प्रतीक माने जाते हैं।
3. कलश की तैयारी
- पीतल, तांबे या मिट्टी का कलश लें।
- उसमें गंगाजल भरें और सुपारी, सिक्का, अक्षत (चावल), दुर्वा डालें।
- कलश के मुख पर आम के पत्ते लगाएँ।
4. नारियल स्थापना
- लाल कपड़े में नारियल लपेटकर कलश के ऊपर रखें।
- नारियल को कलश का शिखर माना जाता है।
5. देवी का आवाहन
- माँ दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएँ।
- “ॐ दुं दुर्गायै नमः” मंत्र का जप करते हुए कलश स्थापित करें।
🌼 कलश में डाली जाने वाली वस्तुओं का महत्व
- गंगाजल: पवित्रता और जीवन शक्ति
- आम के पत्ते: सात्विक ऊर्जा और सकारात्मकता
- नारियल: समर्पण और उन्नति का प्रतीक
- जौ के बीज: वृद्धि और शुभ फल
- सुपारी और सिक्का: समृद्धि और स्थिरता
📖 घट स्थापना से जुड़ी पौराणिक मान्यता
देवी भागवत पुराण में उल्लेख है कि कलश में समस्त देवताओं का वास होता है।
- ब्रह्मा – मुख में
- विष्णु – गले में
- शिव – मूल में
- सरस्वती – जल में
- लक्ष्मी – धातु में
🌍 वैज्ञानिक दृष्टि से कलश स्थापना
- मिट्टी का पात्र और जल वातावरण को ठंडक और शुद्धता प्रदान करते हैं।
- नारियल और आम के पत्तों से वातावरण में प्राकृतिक सुगंध और ताजगी आती है।
- अंकुरित जौ कार्बन डाइऑक्साइड सोखकर ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
🌸 नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व
- चैत्र नवरात्रि: नए साल और नई ऊर्जा का आरंभ।
- शारदीय नवरात्रि: शक्ति की उपासना की शुरुआत।
- दोनों ही नवरात्रियों में कलश स्थापना को अनिवार्य माना जाता है।
नवरात्रि के पहले दिन की कलश स्थापना की सही विधि और महत्व समझकर ही भक्तजन इस पवित्र अनुष्ठान को संपन्न करते हैं।
यह केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं बल्कि ऊर्जा, सकारात्मकता और दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने का साधन है।
जब हम श्रद्धा और विश्वास के साथ कलश स्थापित करते हैं, तो मानो माँ दुर्गा स्वयं हमारे घर पधारती हैं और पूरे वातावरण को शुभता से भर देती हैं।
