ग्रहण क्या होता है? जानें 3 प्रमुख प्रकार और उनका रहस्य | Eclipse Facts 2025

A minimalist depiction of solar eclipse phases captured in a crescent pattern on a dark background. ग्रहण क्या होता है

🌑 ग्रहण क्या होता है, कब लगता है और कितने प्रकार के ग्रहण होते हैं?

ग्रहण प्रकृति की एक अद्भुत खगोलीय घटना है, जिसे देखने के लिए लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं। ग्रहण का अर्थ है – किसी आकाशीय पिंड का प्रकाश किसी दूसरे पिंड द्वारा आंशिक या पूर्ण रूप से ढक जाना। आमतौर पर हम सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) और चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) के बारे में सुनते हैं।

👉 इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि ग्रहण क्या होता है, यह कब लगता है और इसके कितने प्रकार होते हैं।

🌍 ग्रहण क्या होता है? (Grahan Meaning in Hindi)

जब कोई खगोलीय पिंड, जैसे चंद्रमा या पृथ्वी, सूर्य की रोशनी को रोक देता है और प्रकाश किसी पिंड तक नहीं पहुँच पाता, तो उस स्थिति को ग्रहण कहते हैं। सूर्य की रोशनी रुक जाए तो सूर्य ग्रहण लगता है। चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ जाए तो चंद्र ग्रहण लगता है। यह घटना खगोलशास्त्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और धार्मिक मान्यताओं में भी इसका विशेष महत्व है।

🕰️ ग्रहण कब लगता है?

ग्रहण सिर्फ अमावस्या और पूर्णिमा पर ही लग सकता है। सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या को होता है। चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा को होता है। कारण यह है कि इन्हीं स्थितियों में सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आते हैं।

🔭 ग्रहण कितने प्रकार के होते हैं?

A stunning sunset scene with silhouetted trees and vibrant cloud patterns in the sky. ग्रहण क्या होता है

ग्रहण मुख्य रूप से तीन प्रकार के माने जाते हैं –

1. ☀️ सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse)

जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक नहीं पहुँच पाती, तब सूर्य ग्रहण लगता है। सूर्य ग्रहण के प्रकार:पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse): जब चंद्रमा पूरा सूर्य ढक लेता है। आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse): जब चंद्रमा सूर्य का केवल कुछ हिस्सा ढकता है। वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Eclipse): जब चंद्रमा सूर्य के बीच में आकर उसकी किनारी चमक छोड़ देता है, जिसे “आग की अंगूठी” कहते हैं।

2. 🌕 चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse)

जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण लगता है। चंद्र ग्रहण के प्रकार:पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse): जब पूरा चंद्रमा पृथ्वी की छाया में आ जाता है और लालिमा लिए दिखाई देता है। आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse): जब चंद्रमा का केवल एक भाग छाया में आता है। उपछाया चंद्र ग्रहण (Penumbral Lunar Eclipse): जब चंद्रमा पृथ्वी की हल्की छाया से गुजरता है, तो उसका रंग थोड़ा फीका पड़ जाता है।

3. 🛰️ उपग्रह ग्रहण (Satellite Eclipse)

यह कम सुना जाने वाला ग्रहण है। जब पृथ्वी की छाया में आकर कृत्रिम उपग्रह (Artificial Satellite) अंधकारमय हो जाता है, तो इसे उपग्रह ग्रहण कहते हैं। यह घटना आम जनता की बजाय खगोलशास्त्रियों और वैज्ञानिकों के लिए अधिक महत्वपूर्ण है।

🌌 ग्रहण का वैज्ञानिक महत्व

वैज्ञानिक ग्रहण के समय सूर्य की किरणों और चंद्रमा की सतह का अध्ययन करते हैं। ग्रहण से अंतरिक्ष की कई नई जानकारियाँ मिलती हैं। NASA और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियाँ हर ग्रहण पर विशेष रिसर्च करती हैं।

🪔 ग्रहण का धार्मिक महत्व

भारत में ग्रहण को शुभ और अशुभ घटनाओं से जोड़ा जाता है। ग्रहण के दौरान सूतक काल लगता है, जिसमें पूजा-पाठ और भोजन वर्जित होते हैं। ग्रहण के समय मंत्र जाप और दान-पुण्य करने से विशेष पुण्य मिलता है। गर्भवती महिलाओं को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

ग्रहण को लेकर रोचक तथ्य

एक साल में कम से कम 2 और अधिकतम 5 सूर्य ग्रहण हो सकते हैं। चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा को ही लगता है। सूर्य ग्रहण हमेशा दिन में और चंद्र ग्रहण रात में होता है। ग्रहण का असर केवल पृथ्वी तक ही सीमित नहीं, बल्कि समुद्र की लहरों (ज्वार-भाटा) पर भी होता है।

ग्रहण – रहस्य और अनुभव

ग्रहण केवल खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन, संस्कृति और आध्यात्मिकता से भी जुड़ा है। इसे देखने का अनुभव अद्भुत होता है, जब आकाश अंधकारमय हो जाता है और प्रकृति मानो ठहर सी जाती है।

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