धान की अच्छी पैदावार के लिए वैज्ञानिक तरीके क्यों जरूरी हैं?
भारत की कृषि व्यवस्था में धान की खेती का विशेष महत्व है। चावल हमारी जनसंख्या का मुख्य भोजन है और इसकी खपत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में किसानों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि धान की अच्छी पैदावार के लिए वैज्ञानिक तरीके कौन से हैं, जिनसे कम लागत में अधिक उत्पादन लिया जा सके।
आजकल वैज्ञानिक कृषि तकनीक, आधुनिक मशीनों और सही समय पर की जाने वाली खेती के कारण धान की उपज में 20–30% तक की वृद्धि संभव है।

धान की अच्छी पैदावार के लिए वैज्ञानिक तरीके (Step by Step)
- सही किस्म का चुनाव करें
धान की पैदावार में बीज की किस्म सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुसार उच्च उत्पादकता वाली उन्नत किस्में जैसे – MTU-7029, IR-64, स्वर्णा, और शरबती का चुनाव करना चाहिए।
👉 बीज प्रमाणित और रोगमुक्त होना चाहिए।
- बीज उपचार और अंकुरण
धान की अच्छी पैदावार के लिए वैज्ञानिक तरीके में बीज उपचार एक जरूरी कदम है।
- बोने से पहले बीज को 24 घंटे पानी में भिगोकर रखें।
- 2% नमक के घोल में बीज डालकर हल्के बीज अलग कर लें।
- फफूंदनाशक (जैसे थिरम या कार्बेन्डाजिम) से उपचार करने पर बीज रोगमुक्त रहते हैं।
- खेत की तैयारी
धान के लिए खेत समतल और पानी रोकने योग्य होना चाहिए।
- खेत को गहराई से जोतें और पलेवा करें।
- 2–3 बार हैरो या रोटावेटर चलाएं।
- खेत में लेवलिंग (समान सतह) जरूरी है ताकि पानी बराबर रहे।
- पौधशाला और रोपाई का सही तरीका
- पौधशाला में बीजों की बुआई करें और 25–30 दिन बाद पौधे तैयार हो जाते हैं।
- रोपाई 20×15 सेमी की दूरी पर करें।
- हर जगह 2–3 पौधे ही लगाएं ताकि पर्याप्त पोषण और धूप मिले।
- खाद और उर्वरक प्रबंधन
धान की अच्छी पैदावार के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाते हुए संतुलित खाद देना जरूरी है।
- 10 टन गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर डालें।
- नाइट्रोजन (यूरिया), फॉस्फोरस (डीएपी) और पोटाश का संतुलित प्रयोग करें।
- यूरिया को 3 हिस्सों में दें –
- 1/3 हिस्सा रोपाई के समय
- 1/3 हिस्सा कंवर अवस्था में
- 1/3 हिस्सा बालियां निकलते समय
- सिंचाई तकनीक
धान की फसल पानी पर आधारित होती है, लेकिन लगातार पानी भरना जरूरी नहीं है।
- खेत में 5–7 सेमी तक पानी रखें।
- आवश्यकता अनुसार Alternate Wetting and Drying (AWD) पद्धति अपनाएं।
- पानी बचाने और उपज बढ़ाने के लिए लेजर लेवलर और पाइप सिंचाई तकनीक उपयोगी हैं।
- खरपतवार नियंत्रण
धान की अच्छी पैदावार के लिए खरपतवार को नियंत्रित करना बहुत जरूरी है।
- रोपाई के 20–25 दिन बाद निराई-गुड़ाई करें।
- कीटनाशक जैसे Butachlor, Pretilachlor का छिड़काव किया जा सकता है।
- मैनुअल निराई से भी बेहतर परिणाम मिलते हैं।
- रोग और कीट प्रबंधन
धान की फसल में अक्सर कीट और रोग लगते हैं।
- तना छेदक कीट – कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड का प्रयोग करें।
- भूरा धब्बा रोग – मैनकोजेब का छिड़काव करें।
- पर्ण झुलसा रोग – कार्बेन्डाजिम का उपयोग करें।
👉 रोग लगने से पहले ही रोकथाम के उपाय अपनाना जरूरी है।
- आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक
- SRI (System of Rice Intensification) पद्धति से कम पानी और कम बीज में ज्यादा उपज मिलती है।
- ड्रोन स्प्रेयर से कीटनाशक और उर्वरक का समान छिड़काव होता है।
- कंबाइन हार्वेस्टर से धान कटाई करने पर समय और लागत दोनों बचते हैं।
- फसल कटाई और भंडारण
धान की फसल 120–150 दिन में तैयार हो जाती है।
- जब 80% दाने पक जाएं तब कटाई करें।
- कटाई के बाद दानों को धूप में सुखाएं।
- धान को नमी रहित और हवादार जगह पर रखें।
- जैविक खेती और टिकाऊ तरीके
आजकल किसान जैविक खेती की ओर भी बढ़ रहे हैं।
- गोमूत्र, नीम की खली और जीवामृत का प्रयोग करें।
- इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और उपज भी अच्छी होती है।
धान की अच्छी पैदावार के लिए वैज्ञानिक तरीके – किसानों के अनुभव
कई राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा और झारखंड के किसानों ने वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर धान की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि की है। यह साबित करता है कि धान की अच्छी पैदावार के लिए वैज्ञानिक तरीके हर किसान के लिए लाभकारी हैं।
