Chandra Grahan 2025: भारत में समय, सूतक काल, राशियों पर प्रभाव और उपाय
चंद्र ग्रहण 2025 धार्मिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक – तीनों दृष्टियों से बेहद खास माना जा रहा है। वैज्ञानिक रूप से यह एक खगोलीय घटना है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और चंद्रमा पर धरती की छाया पड़ जाती है। वहीं, धर्म और ज्योतिष में इसे अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ और शुभ कार्य वर्जित होते हैं, जबकि राशियों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है।
कब लगेगा साल का अंतिम चंद्र ग्रहण?
- तारीख: 7 सितंबर 2025, रविवार
- ग्रहण का आरंभ (स्पर्श): रात 9:57 बजे
- ग्रहण का मध्य (चरम): रात 11:01 बजे
- ग्रहण का समापन: रात 1:26 बजे
- कुल अवधि: 3 घंटे 29 मिनट
कहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण?
यह ग्रहण भारत सहित एशिया, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और अमेरिका के पूर्वी हिस्सों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा।

सूतक काल कब से मान्य होगा?
चंद्र ग्रहण से ठीक 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है।
- सूतक प्रारंभ: 7 सितंबर 2025, दोपहर 12:19 बजे
- सूतक काल में मंदिर दर्शन, पूजा-पाठ, शुभ कार्य और नए काम शुरू करना वर्जित होता है।
किस राशि और नक्षत्र में लगेगा ग्रहण?
- राशि: कुंभ (शनि देव की राशि)
- नक्षत्र: पूर्वाभाद्रपद (बृहस्पति का नक्षत्र)
किन राशियों को मिलेगा लाभ?
चंद्र ग्रहण इन राशियों के लिए शुभ रहने वाला है:
- मेष, वृषभ, कन्या और धनु राशि
इन जातकों को धन लाभ, करियर और व्यापार में सफलता, विवाहिक सुख और रुके हुए कार्यों में प्रगति मिलेगी।
किन राशियों को रहना होगा सावधान?
इन जातकों को सतर्क रहना चाहिए:
- मिथुन, कर्क, सिंह, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ और मीन राशि
इस दौरान नई शुरुआत से बचें, यात्रा न करें, व्यापार में सावधानी रखें और किसी से गुप्त जानकारी साझा न करें।
चंद्र ग्रहण में मंत्र जाप (राशि अनुसार)
- मेष: ॐ नमः शिवाय शिवाय नमः
- वृषभ: ॐ श्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
- मिथुन: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
- कर्क: ॐ गं गणपतये नमः
- सिंह: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे…
- कन्या: ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय नमः
- तुला: ॐ क्लीं क्लीं श्रीकृष्णाय नमः
- वृश्चिक: ॐ ह्रीं महाभैरवाय नमः
- धनु: ॐ ह्रीं श्रीं बृं बृहस्पतये नमः
- मकर: ॐ श्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
- कुंभ: ॐ प्रां प्रीं प्रौं शं शनैश्चराय नमः
- मीन: ॐ बृं बृहस्पतये नमः
ग्रहण में क्या करें और क्या न करें
✅ ग्रहण के समय करें:
- भगवान का स्मरण और मंत्र जाप
- ध्यान और साधना
- भोजन में तुलसी पत्ते डालना
- ग्रहण के बाद स्नान और दान-पुण्य
❌ ग्रहण के समय न करें:
- सोना, खाना-पीना या रसोई कार्य
- बाल/नाखून काटना
- धारदार वस्तुओं का प्रयोग (विशेषकर गर्भवती महिलाएं)
- किसी नए काम की शुरुआत
गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानियां
- घर के अंदर रहें
- धारदार चीजों से बचें
- ग्रहण के बाद स्नान करें
- बुजुर्ग और बच्चों को भी सुरक्षित रखना जरूरी है
चंद्र ग्रहण और तुलसी-कुशा का महत्व
- तुलसी पत्ते भोजन को अशुद्ध होने से बचाते हैं
- कुशा पूजा और मंत्र जाप में नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है
- ग्रहण के बाद गंगाजल और तुलसी से घर की शुद्धि करनी चाहिए
ब्लड मून क्या है?
पूर्ण चंद्र ग्रहण के समय जब चंद्रमा तांबे या लाल रंग का दिखाई देता है, उसे ब्लड मून कहा जाता है। यह धरती के वायुमंडल से होकर गुजरने वाली रोशनी के कारण होता है।
7 सितंबर 2025 का चंद्र ग्रहण धार्मिक, वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास होगा। यह भारत में पूरी तरह दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य रहेगा। इस दिन शुभ कार्यों से बचें, मंत्र जाप और ध्यान करें और ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान व दान-पुण्य करना न भूलें।
