मशरूम की खेती: पूरी जानकारी, प्रकार और फायदे

आज के समय में मशरूम की खेती किसानों और युवाओं के लिए कमाई का बेहतरीन विकल्प बन चुकी है। यह केवल सब्ज़ी ही नहीं बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर सुपरफूड भी है। आइए जानते हैं मशरूम की खेती कब, कैसे और किन तरीकों से की जाती है और इसके क्या फायदे हैं।
मशरूम क्या है और इसका इतिहास
मशरूम एक प्रकार का कवक (Fungus) है जो मिट्टी या सड़े हुए जैविक पदार्थों पर उगता है। इसे हजारों साल पहले चीन और मिस्र में औषधि और भोजन के रूप में प्रयोग किया जाता था। भारत में मशरूम की आधुनिक खेती की शुरुआत 1960 के दशक में हिमाचल प्रदेश और हरियाणा से हुई थी। आज यह खेती पूरे भारत में की जा रही है और किसान इसे आय का अतिरिक्त स्रोत मानते हैं।
मशरूम की खेती कब करें?
- मौसम: बटन मशरूम के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे बेहतर है।
- ऑयस्टर मशरूम: इसे गर्मियों और बरसात में भी उगाया जा सकता है।
- मिल्की मशरूम: दक्षिण भारत में यह पूरे साल उगाया जाता है।
- तापमान: 20°C से 28°C सबसे उपयुक्त माना जाता है।
- नमी: 70% से 80% तक आर्द्रता जरूरी है।
मशरूम की खेती की प्रक्रिया
- कम्पोस्ट तैयारी: भूसा, गोबर, यूरिया और चूना मिलाकर कम्पोस्ट बनाया जाता है। यह मशरूम की जड़ों के लिए पोषण का काम करता है।
- स्पॉन डालना: कम्पोस्ट में मशरूम का बीज यानी स्पॉन मिलाया जाता है।
- बैगिंग या ट्रे: कम्पोस्ट को बैग या ट्रे में भरकर शेड/कमरे में रखा जाता है।
- तापमान और नमी: कमरे में नमी बनाए रखने के लिए दिन में दो बार पानी का छिड़काव जरूरी है।
- फ्रूटिंग: लगभग 20–25 दिनों में मशरूम के छोटे-छोटे फल निकलने लगते हैं।
- कटाई: 35–40 दिनों के बाद कटाई शुरू हो जाती है।
मशरूम के प्रमुख प्रकार
1. बटन मशरूम
सबसे लोकप्रिय और ज्यादा खाया जाने वाला मशरूम।
2. ऑयस्टर मशरूम
कम लागत और आसानी से उगने वाला मशरूम।
3. मिल्की मशरूम
सफेद रंग का मशरूम, दक्षिण भारत में अधिक प्रचलित।
4. शिटाके मशरूम
औषधीय गुणों से भरपूर और निर्यात के लिए महत्वपूर्ण।
5. पैडी स्ट्रॉ मशरूम
धान के पुआल पर उगाया जाने वाला मशरूम।
लागत और मुनाफा
मशरूम की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे कम जगह और कम निवेश में शुरू किया जा सकता है। लगभग 10×10 फीट के कमरे में 50–60 बैग रखे जा सकते हैं।
- 1 बैग की लागत: ₹100–150
- 1 बैग से उत्पादन: 2–3 किलो मशरूम
- बाजार मूल्य: ₹150–250 प्रति किलो
- कुल मुनाफा: खर्च का लगभग 3–4 गुना
भारत में मशरूम की खेती कहाँ होती है?
भारत में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और केरल मशरूम उत्पादन के प्रमुख राज्य हैं। इसके अलावा अब छोटे किसान भी घर पर छोटे पैमाने पर मशरूम उगाकर स्थानीय बाजार में बेच रहे हैं।
सरकारी योजनाएँ और मदद
- कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को प्रशिक्षण और बीज उपलब्ध कराते हैं।
- राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड मशरूम यूनिट लगाने के लिए सब्सिडी प्रदान करता है।
- राज्य सरकारें स्थानीय स्तर पर मुफ्त प्रशिक्षण शिविर आयोजित करती हैं।
मशरूम की खेती में सफलता के टिप्स
- बीज हमेशा प्रमाणित जगह से ही लें।
- कम्पोस्ट की गुणवत्ता से कभी समझौता न करें।
- कमरे में साफ-सफाई और नमी पर ध्यान दें।
- कटाई समय पर करें ताकि क्वालिटी बनी रहे।
- मार्केटिंग से पहले मशरूम को ठंडी जगह पर स्टोर करें।
चुनौतियाँ
- तापमान और नमी का नियंत्रण कठिन।
- मार्केटिंग और बिक्री की समस्या।
- गलत तकनीक अपनाने से पूरा बैच खराब हो सकता है।
- भंडारण (Storage) की कमी।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: क्या मशरूम की खेती घर पर की जा सकती है?
हाँ, छोटे बैग और ट्रे के जरिए घर में भी संभव है।
प्रश्न: क्या मशरूम की खेती लाभकारी है?
जी हाँ, सही तरीके से की जाए तो बहुत लाभकारी है।
प्रश्न: क्या सरकारी मदद मिलती है?
हाँ, राज्य और केंद्र सरकारें सब्सिडी और प्रशिक्षण उपलब्ध कराती हैं।
