15 अगस्त क्यों मनाया जाता है? इतिहास, 1947 की घटनाएँ, किसने तारीख चुनी और दुनिया में स्वतंत्रता दिवस कब होता है
भारत का स्वतंत्रता दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि सदियों की गुलामी के बाद मिली स्वतंत्रता, असंख्य बलिदानों, और लोकतांत्रिक भारत के जन्म का प्रतीक है। यहाँ हम 15 अगस्त के इतिहास, 1947 में हुए घटनाक्रम, तारीख के चयन, विभाजन, परंपराओं और अन्य देशों के राष्ट्रीय दिवसों तक—सब कुछ सरल, प्रमाण-आधारित और रोचक शैली में समझते हैं।विषय-सूची
- 15 अगस्त क्यों मनाया जाता है?
- 1947: 14–15 अगस्त की रात को क्या हुआ?
- तारीख किसने चुनी और कहाँ निर्णय हुआ?
- आजादी से पहले का लंबा संघर्ष
- विभाजन का दर्द और चुनौतियाँ
- भारत में 15 अगस्त कैसे मनाते हैं?
- रोचक तथ्य, ध्वज और परंपराएँ
- अन्य देशों में स्वतंत्रता/राष्ट्रीय दिवस कब होता है?
- FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

15 अगस्त क्यों मनाया जाता है?
हर वर्ष 15 अगस्त को भारत अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है क्योंकि इसी तिथि को 1947 में भारत ब्रिटिश शासन से मुक्त हुआ। लगभग दो शताब्दियों तक भारत के संसाधन, श्रम और नागरिक अधिकार बाहरी सत्ता के नियंत्रण में रहे। यह स्वतंत्रता केवल राजनीतिक सत्ता-हस्तांतरण नहीं था; यह स्वाभिमान, स्वशासन और समता की पुनर्स्थापना थी।
आजादी के इस दिन को मनाने का उद्देश्य शहीदों के प्रति कृतज्ञता, लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान, और नई पीढ़ी में राष्ट्र-निर्माण की प्रेरणा जगाना है। स्कूलों से लेकर सरकारी संस्थाओं तक, गाँवों से लेकर महानगरों तक—हर जगह तिरंगा लहराता है और देशभक्ति के गीत गूंजते हैं।
1947: 14–15 अगस्त की रात को क्या हुआ?
14 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि से 15 अगस्त की सुबह तक भारत के इतिहास की सबसे निर्णायक घड़ियाँ बीतीं। ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Indian Independence Act 1947 के आधार पर भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र डोमिनियन बने। दिल्ली में स्थित संविधान सभा में आधी रात को औपचारिक सभा आयोजित हुई जहाँ पंडित जवाहरलाल नेहरू ने मशहूर भाषण “Tryst with Destiny” देकर देश को संबोधित किया। यह भाषण संविधान सभा भवन (अब संसद परिसर का भाग) में हुआ था, जो लोकतांत्रिक भारत के उदय का ऐतिहासिक साक्षी बना।
सुबह होते-होते राजधानी प्रकाश और उल्लास से जगमगा उठी। इसके बाद परंपरा के रूप में लाल किले पर ध्वजारोहण और प्रधानमंत्री का देश-सम्बोधन शुरू हुआ—जो आज भी हर वर्ष निभाया जाता है। देशभर के शहरों-गाँवों में झंडा-रोहण, प्रभात-फेरी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और देशभक्ति के आयोजन हुए।
मुख्य बिंदु (15 अगस्त 1947)
- भारतीय ध्वज का औपचारिक ध्वजारोहण और राष्ट्रगान।
- रेडियो पर प्रधानमंत्री का संदेश; देशभर में सार्वजनिक सभाएँ।
- नई प्रशासनिक इकाइयों का गठन और शपथ-ग्रहण प्रक्रियाएँ।
तारीख किसने चुनी और कहाँ निर्णय हुआ?
भारत की स्वतंत्रता की रूपरेखा ब्रिटिश संसद में बने Indian Independence Act, 1947 से तय हुई, जिसे 18 जुलाई 1947 को शाही स्वीकृति मिली। इस अधिनियम के तहत ब्रिटिश भारत को दो डोमिनियन—भारत और पाकिस्तान—में विभाजित किया गया।
स्वतंत्रता की तिथि चुनने का अधिकार अंतिम ब्रिटिश वाइसराय लॉर्ड माउंटबेटन के पास था। उन्होंने 15 अगस्त तिथि इसलिए चुनी क्योंकि यह 15 अगस्त 1945—द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के आत्मसमर्पण—की दूसरी वर्षगांठ थी। इस प्रतीकात्मक चयन ने स्वतंत्र भारत की तिथि को वैश्विक इतिहास से भी जोड़ दिया।
महत्वपूर्ण: “Tryst with Destiny” भाषण लाल किले पर नहीं, बल्कि संविधान सभा में आधी रात को हुआ था; लाल किले की परंपरा ध्वजारोहण और प्रधानमंत्री के दिन-दिवसीय संबोधन की है।

आजादी से पहले का लंबा संघर्ष
भारत की आज़ादी किसी एक घटना का परिणाम नहीं थी, बल्कि उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध से बीसवीं सदी के मध्य तक चले संगठित आंदोलनों, किसान-श्रमिक प्रतिरोधों, सांस्कृतिक जागरण और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की संयुक्त देन थी।
मुख्य पड़ाव
- 1857 का प्रथम स्वाधीनता संग्राम: सैनिक विद्रोह से शुरू होकर व्यापक जन-विद्रोह में बदला; असफल रहा पर स्वतंत्रता की चेतना जगा गया।
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (1885): राजनीतिक प्रतिनिधित्व की माँग का मंच; धीरे-धीरे जनाधिकारों की लड़ाई का केंद्र बना।
- बंग-भंग विरोध (1905): स्वदेशी आंदोलन, बहिष्कार और स्वावलंबन का सूत्रपात।
- जालियांवाला बाग (1919): नृशंस नरसंहार ने औपनिवेशिक शासन के वास्तविक स्वरूप को उजागर किया।
- असहयोग (1920) और सविनय अवज्ञा (1930): सत्याग्रह, नमक सत्याग्रह और जनांदोलन की अभूतपूर्व लहर।
- भारत छोड़ो (1942): “अंग्रेज़ो भारत छोड़ो”—जन-प्रतिरोध की चरम लहर; हजारों गिरफ्तारियाँ।
इन आंदोलनों के साथ असंख्य गुमनाम नायकों, क्रांतिकारियों, कवियों, पत्रकारों और सामाजिक सुधारकों का योगदान जुड़ा। जेलों में यातनाएँ, फाँसी के फंदे, निर्वासन—इन सबके बावजूद स्वतंत्रता की लौ बुझी नहीं।
विभाजन का दर्द और चुनौतियाँ
आजादी के साथ ही भारतीय उपमहाद्वीप का विभाजन हुआ—भारत और पाकिस्तान के रूप में। पंजाब और बंगाल के हिस्सों का पुनर्गठन हुआ, जिससे करोड़ों लोग शरणार्थी बन गए। साम्प्रदायिक हिंसा और पलायन की त्रासद घटनाएँ घटित हुईं।
विभाजन ने नए भारत के सामने सुरक्षा, पुनर्वास, प्रशासनिक ढाँचे के पुनर्निर्माण और आर्थिक स्थिरता जैसी विशाल चुनौतियाँ खड़ी कर दीं। फिर भी लोकतांत्रिक संस्थाओं के निर्माण, संविधान-निर्माण और पंचवर्षीय योजनाओं की शुरुआत के साथ भारत ने तेज़ी से आगे बढ़ने का निश्चय किया।
भारत में 15 अगस्त कैसे मनाते हैं?
आजादी का जश्न केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं है; यह सांस्कृतिक विविधता और एकता का सार्वजनिक उत्सव है।
- लाल किले पर ध्वजारोहण: प्रधानमंत्री तिरंगा फहराते हैं और राष्ट्रीय विकास, नीतियों और उपलब्धियों पर संबोधन देते हैं।
- स्कूल-कॉलेज कार्यक्रम: ध्वजारोहण, मार्च-पास्ट, नाटक, क्विज़, कविताएँ और देशभक्ति गीत।
- समुदाय और आवासीय सोसायटी: प्रभात फेरियाँ, स्वच्छता अभियान, रक्तदान और वृक्षारोपण जैसे सामाजिक उपक्रम।
- डिजिटल इंडिया का रंग: ऑनलाइन प्रसारण, सोशल मीडिया अभियानों में तिरंगा प्रोफ़ाइल, ई-ट्रिविया और ऐतिहासिक क्विज़।

ध्वज संहिता के आवश्यक बिंदु (संक्षेप)
- ध्वज का सम्मान सर्वोपरि; जमीन को न छुए, फटा/मला न हो।
- सही अनुपात (2:3) और रंगों की अनुशंसित छाया का ध्यान।
- रात में फहराने पर उचित प्रकाश व्यवस्था।
रोचक तथ्य, ध्वज और परंपराएँ
- राष्ट्रीय ध्वज की रचना: तिरंगे के अंतिम स्वीकृत स्वरूप के पीछे पिंगली वेंकैया का योगदान माना जाता है; बीच में अशोक चक्र न्याय और गति का प्रतीक है।
- राष्ट्र के नाम संदेश: स्वतंत्रता दिवस से पूर्व राष्ट्रपति का अभिभाषण प्रसारित होता है।
- लोक-संस्कृति: देशभक्ति गीत, कविताएँ, चित्रकला/निबंध प्रतियोगिताएँ—नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ती हैं।
- सैनिक सम्मान: शौर्य पदकों की घोषणाएँ और सैनिक परेड—संरक्षा बलों के त्याग को सार्वजनिक सम्मान।
अन्य देशों में स्वतंत्रता/राष्ट्रीय दिवस कब होता है?
हर राष्ट्र का स्वतंत्रता दिवस उसकी ऐतिहासिक यात्रा से जुड़ा है—किससे आजादी मिली, कब राज्य-निर्माण हुआ या कब गणतंत्र बना। नीचे प्रमुख देशों की प्रतिनिधि सूची दी जा रही है:
| देश | तिथि | घटना/संदर्भ | वर्ष |
|---|---|---|---|
| भारत | 15 अगस्त | ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता | 1947 |
| पाकिस्तान | 14 अगस्त | ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता | 1947 |
| अमेरिका | 4 जुलाई | स्वतंत्रता घोषणा | 1776 |
| फ्रांस (बैस्टिल डे) | 14 जुलाई | फ्रांसीसी क्रांति का प्रतीक | 1789 |
| इंडोनेशिया | 17 अगस्त | नीदरलैंड से स्वतंत्रता की घोषणा | 1945 |
| घाना | 6 मार्च | ब्रिटेन से स्वतंत्रता | 1957 |
| दक्षिण कोरिया (ग्वांगबोकजोल) | 15 अगस्त | जापानी उपनिवेश से मुक्ति का दिवस | 1945 |
| उत्तर कोरिया | 15 अगस्त | जापानी शासन से मुक्ति (राष्ट्र दिवस) | 1945 |
| बहरीन | 15 अगस्त | ब्रिटेन से स्वतंत्रता (राष्ट्रीय दिवस अलग) | 1971 |
| कांगो (Republic of the Congo) | 15 अगस्त | फ्रांस से स्वतंत्रता | 1960 |
| लिकटेंस्टीन | 15 अगस्त | राष्ट्रीय दिवस (ऐतिहासिक/धार्मिक परंपरा से जुड़ा) | — |
| वियतनाम | 2 सितंबर | फ्रांस/जापान से स्वतंत्रता की घोषणा | 1945 |
| मैक्सिको | 16 सितंबर | स्वतंत्रता संग्राम का प्रारंभ | 1810 |
| ब्राजील | 7 सितंबर | पुर्तगाल से स्वतंत्रता | 1822 |
| फिलीपींस | 12 जून | स्पेन से स्वतंत्रता की घोषणा | 1898 |
ध्यान दें कि कुछ देशों में इंडिपेंडेंस डे और नेशनल डे अलग-अलग तिथियों पर मनाए जाते हैं, जैसे बहरीन—जहाँ 15 अगस्त स्वतंत्रता की तिथि है, जबकि राष्ट्रीय दिवस दिसंबर में मनाया जाता है। इसी तरह कई देशों में गणतंत्र दिवस, एकता दिवस या राज्य-गठन दिवस अलग अवसरों पर मनाए जाते हैं।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
भारत में 15 अगस्त किस कानूनी प्रावधान के तहत आया?
Indian Independence Act, 1947 के तहत—जो ब्रिटिश संसद में पारित हुआ—भारत और पाकिस्तान दो डोमिनियन बने और सत्ता-हस्तांतरण की प्रक्रिया 15 अगस्त 1947 को लागू हुई।
पहला तिरंगा कहाँ फहराया गया और ‘Tryst with Destiny’ कहाँ दिया गया?
स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण की राष्ट्रीय परंपरा लाल किले पर है, जबकि “Tryst with Destiny” भाषण संविधान सभा (दिल्ली) में मध्यरात्रि को दिया गया था।
क्या 15 अगस्त केवल राजनैतिक घटना है?
नहीं। यह सांस्कृतिक पुनर्जागरण, सामाजिक सुधारों, आर्थिक आत्मनिर्भरता और नागरिक अधिकारों के समेकित संघर्ष का परिणाम है—इसलिए इसे राष्ट्रीय नवजागरण का प्रतीक भी माना जाता है।
क्या हर वर्ष कोई विशेष थीम घोषित होती है?
कई बार सरकारें विशेष अभियानों/थीमों (जैसे आज़ादी का अमृत महोत्सव) के साथ जन-भागीदारी बढ़ाती हैं। विद्यालयों, संस्थानों व मीडिया में इन्हीं विषयों पर कार्यक्रम होते हैं।
