नवरात्रि का नवाँ दिन – माँ सिद्धिदात्री
नवरात्रि का नवाँ दिन – माँ सिद्धिदात्री को समर्पित होता है। नवरात्रि के अंतिम दिन, जिसे नवमी भी कहा जाता है, भक्त माँ के इस स्वरूप की पूजा करते हैं। माँ सिद्धिदात्री को सभी अष्टसिद्धियों और नौ निधियों की दात्री माना जाता है।
भक्त मानते हैं कि माँ सिद्धिदात्री की कृपा से न केवल सांसारिक सुख-सुविधाएँ मिलती हैं बल्कि आत्मज्ञान और मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त होता है।
माँ सिद्धिदात्री का स्वरूप
- माँ का रूप अत्यंत शांत, दिव्य और सौम्य है।
- उनके चार हाथ हैं, जिनमें चक्र, गदा, शंख और कमल है।
- वे शेर पर विराजमान रहती हैं, जो शक्ति और पराक्रम का प्रतीक है।
- माँ को अर्धनारीश्वर शक्ति भी माना गया है, क्योंकि भगवान शिव ने इन्हीं की कृपा से अर्धनारीश्वर रूप धारण किया था।

माँ सिद्धिदात्री की कथा
शास्त्रों के अनुसार, जब भगवान शिव ने परम सिद्धि प्राप्त करने की इच्छा जताई तो उन्होंने माँ सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या की। माँ ने उन्हें अर्धनारीश्वर का रूप प्रदान किया।
इसीलिए यह कहा जाता है कि माँ सिद्धिदात्री की पूजा करने से साधक को न केवल सांसारिक सुख मिलता है, बल्कि अध्यात्मिक ऊँचाई भी प्राप्त होती है।
👉 इस कथा का उल्लेख श्रीमद् देवी भागवत और दुर्गा सप्तशती में भी मिलता है। (External DoFollow link)
नवमी पर माँ सिद्धिदात्री की पूजा विधि
नवरात्रि के नौवें दिन भक्त माँ सिद्धिदात्री की पूजा निम्न विधि से करते हैं:
- प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- माँ सिद्धिदात्री की मूर्ति या चित्र को गंगाजल से शुद्ध करें।
- धूप, दीप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें।
- माँ के मंत्र का जप करें –
“ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥” - भक्त स्त्रियाँ कन्या पूजन (कुमारी पूजन) भी करती हैं।
- भोग में हलवा, पूड़ी, चने और नारियल चढ़ाया जाता है।
माँ सिद्धिदात्री की विशेषताएँ
- माँ सिद्धिदात्री आठों सिद्धियाँ (अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व) प्रदान करती हैं।
- ये भक्त को आध्यात्मिक शक्ति और मानसिक शांति देती हैं।
- माँ की आराधना से भूत-प्रेत, रोग और नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं।
- नवमी पर माँ की कृपा से साधक को ज्ञान और विवेक प्राप्त होता है।
साधना और मंत्र
भक्तजन नवमी के दिन विशेष मंत्र जप और साधना करते हैं:
बीज मंत्र –
“ॐ ह्रीं सिद्धिदात्र्यै नमः॥”
स्तोत्र पाठ – दुर्गा सप्तशती के नवम अध्याय का पाठ करें।
साधना से मिलने वाले लाभ –
- इच्छाओं की पूर्ति
- सफलता में बाधाओं का निवारण
- धन, वैभव और शांति की प्राप्ति
नवमी और कन्या पूजन
नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व है।
- भक्त 9 कन्याओं और एक भैरव (लड़के) को भोजन कराते हैं।
- उन्हें वस्त्र, मिठाई और दक्षिणा दी जाती है।
- ऐसा करने से माना जाता है कि स्वयं माँ सिद्धिदात्री प्रसन्न होती हैं।
माँ सिद्धिदात्री की कृपा से मिलने वाले चमत्कारी लाभ
- साधक को सभी सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।
- जीवन से भय और रोग दूर होते हैं।
- परिवार में सौहार्द और समृद्धि आती है।
- आध्यात्मिक ज्ञान और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
- व्यापार और करियर में भी सफलता मिलती है।
भक्तों की मान्यता
भक्त मानते हैं कि नवरात्रि के नवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा करने से न केवल भौतिक जीवन सुधरता है बल्कि आत्मा भी पवित्र होती है। यही कारण है कि नवमी के दिन मंदिरों में विशेष भीड़ उमड़ती है और भक्त पूरे भक्ति भाव से माँ की आराधना करते हैं।
नवरात्रि का नवाँ दिन – माँ सिद्धिदात्री की पूजा से जीवन में नई ऊर्जा, शक्ति और आत्मबल का संचार होता है। माँ सिद्धिदात्री का स्मरण करते ही मन के सारे संशय दूर हो जाते हैं और आत्मा को अद्भुत शांति की प्राप्ति होती है।
