🌸 Navratri Ka Dusra Din – Maa Brahmacharini
Navratri ka dusra din – Maa Brahmacharini की आराधना के लिए समर्पित है। नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री देवी की पूजा करने के बाद भक्त दूसरे दिन तपस्या और ब्रह्मचर्य की प्रतीक माँ ब्रह्मचारिणी की साधना करते हैं।
माना जाता है कि इस दिन की उपासना से साधक को असीम आत्मबल और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
✨ माँ ब्रह्मचारिणी कौन हैं?
- माँ ब्रह्मचारिणी का नाम “ब्रह्म” और “चारिणी” से मिलकर बना है।
- इसका अर्थ है – ब्रह्मचर्य का पालन करने वाली।
- ये माँ दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं और इनकी उपासना से तप, संयम और साधना की शक्ति प्राप्त होती है।
- हाथ में जप की माला और कमंडल है, जो ज्ञान और तपस्या का प्रतीक है।
- इनका स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और तेजस्वी है।
👉 Navratri ka dusra din Maa Brahmacharini की साधना से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और साधक को दिव्य ऊर्जा प्राप्त होती है।

📖 माँ ब्रह्मचारिणी की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार –
- माँ ब्रह्मचारिणी पर्वतराज हिमालय की पुत्री और भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं।
- इन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक घोर तपस्या की।
- इसी कारण इन्हें तपश्चर्या की देवी भी कहा जाता है।
- इनके तप और साधना से प्रभावित होकर भगवान शिव ने इन्हें स्वीकार किया।
👉 इस कथा से यही शिक्षा मिलती है कि धैर्य, संयम और तपस्या से हर कठिनाई पर विजय पाई जा सकती है।
🪔 Navratri Ka Dusra Din – Maa Brahmacharini Puja Vidhi
नवरात्रि के दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी माता की पूजा इस प्रकार की जाती है:
1. संकल्प और स्थान की शुद्धि
- सबसे पहले पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- दीप जलाकर माता ब्रह्मचारिणी का ध्यान करें।
2. कलश स्थापना
- कलश में जल, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते रखें।
- ऊपर नारियल और रोली का तिलक करें।
3. माता ब्रह्मचारिणी का आवाहन
- प्रतिमा या चित्र को चौकी पर स्थापित करें।
- फूल, अक्षत, चंदन और पुष्प अर्पित करें।
4. पूजन सामग्री
- धूप, दीप, कपूर और शुद्ध जल से माता का पूजन करें।
- ब्रह्मचारिणी माता को चंदन, कमल और बेलपत्र विशेष प्रिय हैं।
5. मंत्र और आरती
मंत्र:
“ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः”
👉 इस मंत्र का 108 बार जप करने से मन में शांति और आत्मबल की प्राप्ति होती है।
आरती:
जय ब्रह्मचारिणी माँ, जय जय ब्रह्मचारिणी माँ…
🌼 Navratri Ka Dusra Din Maa Brahmacharini का महत्व
- आध्यात्मिक महत्व: साधक के अंदर तपस्या और धैर्य का भाव जागृत होता है।
- धार्मिक महत्व: माता की पूजा से भक्त को पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- ज्योतिषीय महत्व: इनकी साधना चंद्र ग्रह को शांत करती है।
- वैज्ञानिक महत्व: पूजा और मंत्रजाप से मानसिक शांति और आत्मबल बढ़ता है।
👉 Navratri ka dusra din Maa Brahmacharini की उपासना से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और साधक को दिव्य मार्ग की ओर प्रेरणा मिलती है।
📅 नवरात्रि 2025 का दूसरा दिन
साल 2025 में नवरात्रि का दूसरा दिन 23 मार्च 2025 (रविवार) को होगा।
इस दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा प्रातःकाल में शुभ मुहूर्त पर करनी चाहिए।
🌍 ज्योतिषीय दृष्टि से माँ ब्रह्मचारिणी
- माँ ब्रह्मचारिणी का संबंध मंगल ग्रह से है।
- ज्योतिष में मंगल को ऊर्जा, आत्मबल और साहस का कारक माना जाता है।
- जो भक्त इस दिन माता की साधना करते हैं, उन्हें शक्ति और स्थिरता की प्राप्ति होती है।
📖 ब्रह्मचारिणी माता से जुड़ी मान्यताएँ
- ब्रह्मचारिणी माता की उपासना से आध्यात्मिक साधना में सिद्धि प्राप्त होती है।
- विवाह योग्य कन्याओं को विशेष रूप से माता की पूजा करनी चाहिए।
- यह भी माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से साधक का मन और आत्मबल मजबूत होता है।
नवरात्रि का दूसरा दिन आत्मबल, संयम और तपस्या की साधना का प्रतीक है।
Navratri ka dusra din – Maa Brahmacharini की पूजा से भक्त अपने जीवन में संतुलन, धैर्य और आत्मविश्वास स्थापित कर सकते हैं।
माँ ब्रह्मचारिणी के आशीर्वाद से साधक को सभी कठिनाइयों पर विजय और मोक्ष का मार्ग प्राप्त होता है।
